प्रश्न 2(क): कविः वाणीं किं कथयति?
📝 उत्तरम् (Complete Answer)
कविः वाणीं नवीनां वीणां निनादयितुं लयितनीतिलीनां गीतिं मृदुं गातुं च कथयति।
यहाँ इस प्रश्न का उत्तर दिया गया है। कवि पण्डित जानकीवल्लभ शास्त्री इस गीत में सरस्वती देवी को ‘वाणि’ कहकर सम्बोधित करते हुए उनसे नवीन वीणा बजाने की प्रार्थना करते हैं। वे चाहते हैं कि सरस्वती जी सुन्दर नीति में लीन मधुर गीत का गान करें।
कवि की यह प्रार्थना वसन्त ऋतु के सौन्दर्य के सन्दर्भ में की गई है। वे चाहते हैं कि सरस्वती की वीणा की मधुर ध्वनि से प्रकृति और भी मनमोहक हो जाए। यह गीत स्वाधीनता संग्राम की पृष्ठभूमि में लिखा गया था, जिसमें वीणा के स्वर से जन-जागरण की कामना की गई है।
💡 व्याख्या
नवीनां वीणां निनादयितुम् = नई वीणा को बजाने के लिए
लयितनीतिलीनां गीतिम् = सुन्दर नीति में लीन गीत को
मृदुं गातुम् = मधुर गान करने के लिए
🎯 मुख्य बिन्दु
- कवि सरस्वती देवी को ‘वाणि’ कहकर सम्बोधित करते हैं
- वे नवीन वीणा बजाने की प्रार्थना करते हैं
- सुन्दर नीति में लीन मधुर गीत गाने का आग्रह करते हैं
- यह प्रार्थना वसन्त ऋतु के सौन्दर्य के सन्दर्भ में है
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